तेल अवीव: इजरायल डिफेंस फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने गुरुवार को चेतावनी दी है कि युद्ध के बढ़ते दबाव और सैनिकों की गंभीर कमी के कारण इजरायली सेना 'अंदर से कमजोर होकर टूट सकती' है। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाइयों के बीच उन्होंने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में यह गंभीर चिंता जताई। जनरल जमीर ने मंत्रियों से कहा,'मैं आपके सामने 10 बड़े खतरों की बात उठा रहा हूं।' उन्होंने बताया कि सेना की तैयारियों पर बहुत गंभीर खतरा मंडरा रहा है और तुरंत कानून बनाने की जरूरत है।
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'...तो सेना सामान्य कामकाज भी नहीं कर पाएगी'
IDF चीफ ने कहा कि भर्ती कानून, रिजर्व ड्यूटी कानून और अनिवार्य सैनिक सेवा बढ़ाने वाला कानून जल्द से जल्द बना देने चाहिए। जनरल जमीर ने चेतावनी दी, 'IDF को अब भर्ती कानून, रिजर्व ड्यूटी कानून और अनिवार्य सेवा बढ़ाने वाले कानून की सख्त जरूरत है। अगर ये कदम नहीं उठाए गए तो सेना जल्द ही सामान्य कामकाज भी नहीं कर पाएगी और रिजर्व सिस्टम भी टूट जाएगा।' टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट बताती है कि यह पहली बार नहीं है जब जनरल जमीर ने इस समस्या पर अलर्ट किया हो।
'गाजा युद्ध शुरू होने के बाद समस्या और बढ़ी'
जनवरी महीने में IDF चीफ ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर चेताया था कि सैनिकों की कमी जल्द ही सेना की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से यह समस्या और बढ़ गई है। अक्टूबर 2023 में हुए हमलों के बाद से सेना लगातार संसद को बता रही है कि उसके पास करीब 12000 सैनिकों की कमी है। लगातार बढ़ते ऑपरेशनों के कारण यह दबाव और ज्यादा हो गया है। इस मुद्दे को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को सैनिक सेवा से अभी भी छूट दी जा रही है।
इजरायल के लिए एक बड़े संकट का संकेत
बता दें कि 2024 में इजरायल की हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि हरे दी येशिवा छात्रों को दी जाने वाली छूट का कोई कानूनी आधार नहीं है, फिर भी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां इस छूट को जारी रखने के लिए कानून बनाने की कोशिश कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी 18 से 24 साल की उम्र के करीब 80,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवा सैनिक सेवा के योग्य हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक सेना जॉइन नहीं की है। ऐसे में सेना प्रमुख की यह चेतावनी इजरायल के लिए एक बड़े संकट का संकेत मानी जा रही है।